शराब का हमारे जीवन पर प्रभाव । Effects of alcohol on the body

alcohol side effect
alcohol side effect

शराब का हमारे जीवन पर प्रभाव । Effects of alcohol on the body

शराब का हमारे जीवन पर प्रभाव । Effects of alcohol on the body: संपूर्ण शराबबंदी एक व्यवहारिक कल्पना  मात्र है। शराब के दुष्प्रभाव से इंकार तो किया ही नहीं जा सकता। शराब निर्माताओं व सत्ता प्रतिष्ठान के सोची समझी साजिश के तहत देश के कोने-कोने में शराब का प्रचार प्रसार होता रहा है।इसके जोर शोर से प्रचार व प्रसार ने सामाजिक व आपराधिक गतिविधियों को भारी बढ़ावा दिया है।यह सत्य है शराब और अपराध एक दूसरे के पूरक है।

एक तरफ शराब बंदी लागू की गई है, वहीं दूसरी तरफ कई राज्यों मे अभी भी शराब का बिजनेस खुलेआम चल रही है जिसके फलस्वरुप शराब बिचौलिया बड़े ही जोर शोर से अपने पांव पसार रहे हैं।  इसका बिजनेस जैसे ऑनलाइन सामान मंगाया जाता है ठीक उसी प्रकार इस बिचौलिए को सिर्फ ऑर्डर करना होता है और वह माल घर तक डिलीवरी कर देता है।

वह भी 5 गुणे 6 गुणे दाम ज्यादा लेकर। जबकि शराब माफिया  मात्र दूसरे राज्य का बॉर्डर पार कर ले आता है,जब कि देखा जाता है कि रोज कहीं ना कहीं शराब माफिया शराब की गाड़ी सहित पकड़ता रहता है और उसे थाने ले जाया जाता है लेकिन वहाँ का भी रिपोर्ट मिलता है कि ज्यादा से ज्यादा शराब चूहा पी गया।

शराब का बिजनेस  :

आखिर इतना शराब का माँग है, तब तो शराब से कमाई का एक अच्छा जरिया बना रखा है। इसका कारण एक ही है कि जैसे अंग्रेज चाय का लत लगा कर गए और हम लोग चाय का आदी हो गए हैं। ठीक उसी प्रकार हमारी सरकार शराब के ठेके को देश के कोने-कोने में यहाँ तक की शहर गाँव बस्ती तक ठेका खोल दिया गया, तो भला क्यों नहीं शराब का लत लगेगा। जबकि आप जानते है की  शराब और अपराध एक दूसरे के पूरक हैं।

सरकार :

एक तरफ शराबबंदी के लिए जोरदार प्रयास किया जा रहा है और दूसरी तरफ सत्तातंत्र राजस्व के मोह व शराब के ठेकेदारों की गिरफ्त में इस कदर  जकड़ा हुआ है कि वह देश के जनता की कल्याण की बात क्या करेंगे। जिस दिन गरीब मजदूर की खून -पसीने की कमाई लेकर राजकोष नहीं चलाने का प्रतिज्ञा ले लेंगे। उसी दिन यह शराबबंदी पूरे कठोरतापूर्वक पूरे देश में लग जाएगी जिससे शराब माफिया को शराब पूर्ति ही नहीं होगा।

शराब ऐसा टेररिस्ट है जो हमारे देश राज्य ग्राम  और यहाँ तक की हमारे घर तक को नहीं बख्शा है। हमारे खुश-हाल पारिवारिक  जीवन को मातम में बदल देता है।

शराब ऐसी Slow poison है,  जिसे इसका लत लग गया वह उससे दूर नहीं हो सकता। वह मनुष्य उसका गुलाम हो जाता है। उसके आगे परिवार समाज कुछ भी नहीं दिखता। उसको तो बस दिखता है शराब की बोतल।

हमारे दोस्त आप तो जानते हैं, शराब आज से नहीं यह हजारों वर्षों पुरानी लत है।एक समय था, राजा- महाराजा लोग  सूरा और सुंदरी में डूबा रहता था। इसे पीकर अच्छे-अच्छे भी बेहाल हो जाते हैं। वह क्या कर रहे हैं? उसकी प्रतिष्ठा लूट रही है? वह क्या बोल रहे हैं ? उसे कुछ पता ही नहीं होता।

अच्छे-अच्छे जमींदार और ज्यादा से ज्यादा बेतन उठाने वाले हमारे भाई, दोस्त रुपए को पानी की तरह खर्च कर देते हैं। उसे बोतल की जगह परिवार नहीं दिखता।

जमींदार :

जमींदार शराब की सागर में गोता लगाते – लगाते सारे जमीन को बेच डालते हैं और एक दिन वह जमींदार, फटेहाल रोड छाप बनकर एक पागल की तरह घूमते-फिरते नजर आते हैं। उसके पास रुपए तो रहता है नहीं, लेकिन फिर भी शराब के लिए अब दूसरे के पास हाथ फैलाकर भीख मांगते रहते हैं,

चुके उसको तो शराब के सागर में डुबकी लगाने का बुरा लत जो लग गया है, जो शराब  के सागर में डुबकी लगाकर अपनी जमीन को बेचकर रोड छाप बन गया। वह अब एक चुल्लू शराब के लिए दूसरे के पास हाथ फैलाता फिरता है। उसके बच्चे परिवार को कोई देखने वाला नहीं है। उसका बच्चा अच्छी शिक्षा ग्रहण नहीं ले पाता है। वह एक रोड छाप बनकर रह जाता है।

मजदूर वर्ग :

मेरे दोस्त शराब ऐसी चीज है जो कि आपने देखा कि जमींदार भी शराब की समून्दर में डुबकी लगाने से रोड छाप बनकर, पागल बनकर भटकता रहा, तो हमारे मजदूर वर्ग के भाई लोग पूरे दिन कार्य करते हैं और शाम को उस रुपए से राशन लेकर सपरिवार में बैठ कर भोजन करते हैं।

अगर वह मजदूर भाई शराब की लत में डूबते हैं तो सोचा जाए एक पल के लिए, की उसके बच्चे और परिवार रात का भोजन क्या करेंगे। उसका परिवार जल पीकर ही ना सोएंगे। उस मजदूर  का परिवार का क्या हाल होगा यह प्रश्नवाचक चिन्ह बनकर रह जाता है। शराब आज तक किसी को लाभ नहीं दिया है। वह भुखमरी, शोक और सब से गिरा हुआ इंसान का रूप देता है।

आप  अपने  समाज में देखते होंगे की परिवार, बच्चे अपने पिता के इंतजार में शाम में टकटकी लगाकर इंतजार करते रहते हैं, कि हमारे पिताजी हमारे लिए उधर से कमाई करके दूध का पैकेट जरूर लेकर आएंगे, लेकिन उसी पल देखते हैं। पापा के हाथ में एक शराब की बोतल पीते  और झूमते, गिरते, बजरते आ रहे हैं।

अगर रात का भोजन के लिए रुपए मांगा जाता है तो परिवार बच्चे को बुरी तरह से पिटाई और गाली गलौज शुरू कर देता है। इससे घर का स्थिति बद से बदतर हो जाता है।

बच्चे :

धीरे धीरे जब बच्चे बड़े होते हैं, तो वह भी स्लो पाइजन, शराब का शिकार हो जाते हैं, चुके वह नादानी में समझ बैठा था, पिताजी पीते हैं, तो अच्छा ही चीज होगा और जब घर लाते थे शराब तो, उस बच्चे ने भी थोड़ा स्वाद के लिए पीना शुरू कर दिया। इस प्रकार स्वाद लेते – लेते उसका बच्चे भी पूर्ण शराबी बन गया।

इस प्रकार पिता के मरने के बाद पुत्र भी वही लीलाधारी बन गए। पिता के ही तरह यह भी शराब पीकर  घर में घमासान लड़ाई छेड़ दिया करता था। सभी कमाई का रुपए को बाहर ही पूरा खर्च कर घर खाली लौटता था। बच्चे परिवार को भूखे सोना पड़ता था, कभी कर्ज लेकर खाना पड़ता था।

इस प्रकार से उसके बच्चे भी कुपोषण का शिकार होने लगा। कभी-कभी तो शराब के  नशे में धुत होकर अपने काम को भी भूल जाता था और वह उस दिन पूरे शराब की दुनिया में भटकता फिरता था।

शराब क्या कहता है  :

जबकि शराब खुद बोलता है की अरे मूर्ख तुम मुझे क्या पियोगे। मैं तो तुम्हें ही पी जाता हूँ। जब मैं तुम्हें पीता हूँ तो तुम तीसरी दुनियाँ में चले जाते हो। मैं जिस पर सवार होता हूँ तो सारे बुरे कार्य को करवा कर ही दम लेता हूँ। अच्छे-अच्छे को मंजिल से भटका कर रोड छाप बनाकर छोड़ देता हूँ।जो मुझे पीता है उसे मैं बहुत सुंदर दिखता हूँ, लेकिन जो नहीं पीता है, उसे मैं बहुत बुरा दिखता हूँ। मैं कलयुग का भूत हूँ। जो मेरा ध्यान करता है उसी  में मैं प्रवेश करता हूँ और उसे मैं तरह -तरह का भारी से भारी बीमारी पैदा करता हूँ। उसे मैं छोड़ता हूँ, लेकिन मरने के बाद।

प्राण घातक बीमारी:

उसके अंदर जब में प्रवेश करता हूँ तो उसके आँत में कैंसर का रूप तैयार करता हूँ। किडनी को खा जाता हूँ। हर्ट को चौक कर देता हूँ और ब्रेन को कमजोर कर देता हूँ। उसका सिर्फ  शरीर ही दिखता है, अंदर खोखला ही खोखला कर देता हूँ।

लेकिन मनुष्य ऐसा प्राणी है ,देखता है,समझता है कि शराब हमारा ही नहीं, हमारे परिवार का भी खास दुश्मन है। फिर भी मुझे अगर वह पीता है,तब मैं दूसरा रूप में उसे घातक नुकसान पहुँचाता  हूँ।

वरधू की शादी में :

वर-वधु की शादी में तो मेरे शराबी दोस्त, मुझे अपने अटैची में, तो कोई बैग में, तो कोई कार में हमें रख लेते हैं और जब मुझे वह पीता है, तो उसे पता चलता है कि मैं शराब पी रहा हूँ, लेकिन मुझे वह क्या पिएगा। मैं तो उसे ही पी जाता हूँ और जब मै भारी शैतान के रूप में चढ़ता हूँ तो रास्ते में ही गाड़ी को पेड़ से टकरा-कर गड्ढे में गिरा कर सबका जान ले लेता हूँ। उसमें मेरे दोस्त शराबी ही नहीं, जो हमसे बहुत दूर रहता है,उसे भी मैं मौत के घाट उतार देता हूँ, क्योंकि वह तो हमारे दोस्त शराबी के साथ था और मेरे दोस्त शराबी के साथ जो रहेगा तो मैं उसे कैसे बक्सूंगा क्योंकि मैं तो शैतान भूत हूँ। मैं बचाता नहीं हूँ मार ही देता हूँ। इस प्रकार खुशी को गम  के रूप में तब्दील कर देता हूँ

मेरे शराबी दोस्त :

कुछ मेरे शराबी दोस्त हमसे बचके वर – वधु के  मिलन तक पहुँच जाता है तो मैं वहाँ पर भी अपना खेल दिखाता हूँ जब मैं चढ़ता हूँ तो मेरे प्यारे दोस्त  अपनी गन से गोलियों की बौछार करने लगता है और वह इतना मस्त हो जाता है कि दूसरे को भी शूट कर देता है तो कहीं गाली गलौज करवा कर, लाठी डंडा चलवाकर बराती और शराती गण में खून खराबा करवा देता हूँ जिससे कि इस शुभ बेला को मातम की बेला में परिवर्तन कर देता हूँ। अब तो आप समझ ही गए होंगे कि मैं कैसा भूत हूँ। अब तो शायद आप को समझने में कठिनाई नहीं हुई होगी।

आप देखते होंगे कि शराबी जब रोड से चलता है तो वह लड़खड़ाते,गिरते बजरते और संभलते हुए और अश्लील, गंदी, अभद्र, गाली  का बौछार करते हुए ,यहाँ तक कि मुसाफिर जो चलता है उसे भी नहीं बकसता। चोर, बदमाश अर्थात गुंडा तत्व का लोग या गिरा आचरण का लोग भी इसे पीकर गलत कार्य को अंजाम देते हैं। इतना ही नहीं शराबी को गंदे कार्य और गंदे जगह ज्यादा पसंद आता है

पूर्ण शराबबंदी :

इस प्रकार शराब से देश की होती हानि को देख कर सरकार शराबबंदी पहला गुजरात, दूसरा नागालैंड, तीसरा मिज़ोरम और चौथा बिहार में पूर्ण शराबबंदी लगा दी गई।

पूर्ण शराबबंदी लगने के बावजूद भी बिहार में बड़े जोर शोर से शराब का बिजनेस भूमिगत रूप से फल -फूल रहा है। जबकि बिहार में एक्साइज संशोधित ऐक्टस पटना उच्च न्यायालय द्वारा आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी।

नए अधिनियम को महात्मा गाँधी के जन्म दिवस 2अक्टूबर को लागू किया गया है इसे अंग्रेजी में‘ड्रेकोनियन लॉ’ कहा जाएगा।

उदाहरण के लिए अधिनियम की निम्नलिखित धारा को लें :

‘एक वाटर लीटर’ के बोतल को परिसर के किसी कोने में पाए जाने पर 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को जिसमें महिलाएँ भी सम्मिलित हैं। कम से कम 10 वर्ष  कारावास की सजा, जो आजीवन कारावास भी हो सकती है तथा इसके साथ एक लाख से दस लाख रुपए भी अर्थ-दंड भी मिल सकता है।

बिहार में शराबबंदी को उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया तो नया कानून लागू किया गया। यह पहले के कानून से भी अधिक कठोर है। इससे पुलिस और आबकारी अधिकारियों को और असीमित अधिकार मिल जाएगा। जिलाधिकारी को संपत्ति छीनने का भी अधिकार मिल गया है।

हमारे वैज्ञानिकों ने शराब जो बनाया वह स्वास्थ्य ख्याल से उसे दवाई के रूप मैं one tesponsphul पर Day सेवन करना था, लेकिन इसे पूरे बोतल ही पीना शुरू कर दिया, जिससे लाभ की जगह भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वह आदमी पूरे बोतल का बोतल खाली कर अपने शरीर को बरबाद कर देते हैं।

इसका लक्ष्य पहले घर परिवार को विनाश के कगार पर पहुँचा देते हैं फिर अपने आप को मौत के घाट को चले जाते हैं। वह भी इतनी सरलता से नहीं। भारी बीमारी को झेलते हुए और बचे-खुचे जमीन जायदाद को बीमारी में लगाकर सारे संपत्ति को अपने साथ लेकर चले जाते हैं। परिवार बच्चे रोड छाप बनकर एक भिखारी के रूप में रह जाता है। यह है शराबी का करिश्मा

शराब पीने का भी कई कैटेगरी है। साधारण वर्ग (मजदूर क्लास) के लोग देसी शराब या तारी से अपनी प्यास बुझाते हैं। जहरीली शराब पीने से कई मौत का भी शिकार हुए हैं। इस शराब के बहाने मित्रता में भेदभाव को, बदले की भावना में बदल कर कभी शराब में ही जहर मिला दिया जाता है। जिससे कि कई साथी का जाने भी चली गई है, क्योंकि वह जब ज्यादा पी लेता है तो अपने मत में नहीं रहता है और उसमें कुछ भी डाला तो उसे कुछ भी पता नहीं है।

इतनी कड़ी कानून व्यवस्था होने के बावजूद भी शराब का बिजनेसमैन शराबी को उसके घर तक शराब पहुँचाता है कीमत ज्यादा लगता है लेकिन उसके घर तक पहुँच जाता है, जबकि डेली न्यूज़ में देखने को मिलता है कि आज  इतना शराब पकड़ाया।

आज इतना शराब ध्वस्त किया गया। शराब का बिजनेस मैन भी पकड़ाता है, लेकिन फिर भी इसका बिजनेस थम नहीं रहा है और तेज गति होता जा रहा है। पीने वाला पीता जा रहा है।

पीकर चौक चौराहे, महफिल अथवा अपने घर में हँगामा नहीं करता क्योंकि उसको पता है कि अगर मैं हँगामा करता हूँ तो मुझे दस वर्ष के लिए जेल की कोठरी में गुजारनी होगी। इसलिए पीता तो है, लेकिन होशो हवास में।

शराबी को एक गाना के रूप में भी बहुत अच्छे ढंग से  संदेश पहुंचाने का कोशिश किया है।


नशा न करना,मान लो कहना, प्यारे भाई बहना।

होगी बड़ी खराबी, होगी बड़ी खराबी।।


नशा में डर है, नशा जहर है। जीते जी मर जाना।

होगी बड़ी खराबी, होगी बड़ी खराबी।।


दारू मत पीना भैया, पागल फिरोगे तुम बाजार।

भूखे रहेंगे बच्चे, बीवी रहेगी इंतजार में।।


बिकेगी गहना, फिर क्या कहना ।

दर दर ठोकर खाना।।


होगी बड़ी खराबी, होगी बड़ी खराबी।

नशा में डर है, नशा जहर है।।


जीते जी मर जाना।

होगी बड़ी ख़राबी,होगी बड़ी ख़राबी।।


बीड़ी ना पीना भैया  जलेगा कलेज़ा बातों-बात में।

फेफड़ा में होगा कैंसर नींद ना होगी रातों रात में।।


भरी जवानी चौपट होगी, हजम ना होगा खाना।

होगी बड़ी ख़राबी, होगी बड़ी ख़राबी।।


नशा में डर है, नशा जहर है।

जीते जी मर जाना, होगी बड़ी ख़राबी।।


खैनी  ना खाना बंधु, छाला पड़ेंगे तेरे होंठ में।

मसूढ़ा  में होगा कैंसर, गाल फूलेंगे तेरी चाल में।।


शर्म लगेगी, बात ना होगी।

मुश्किल होगा जीना।।


होगी बड़ी खराबी, होगी बड़ी खराबी।

शराब न पीना भैया, कैंसर बुलावे बड़ी शौक से।।


दम निकलेगा अर्थी सजेगी, रोएगी प्यारी बहना।

होगी बड़ी ख़राबी, होगी बड़ी खराबी।।


दोस्तों यह Effects of alcohol on the body का जो मैं विचार आप लोगों के सामने व्यक्त किया। वह आपको कैसा लगा। यह संदेश हमें कमेंट के माध्यम से अवश्य भेजने का कष्ट करेंगे और जो त्रुटि हुआ हो वह प्रत्युत्तर भी हमें कमेंट के माध्यम से जरूर भेंट करने का कोशिश करेंगे। अगर अच्छा लगा हो तो लाइक बटन दबाकर अपने समाज और दोस्तों तक शेयर कर अवश्य पहूँचाने का काम करेंगे। धन्यवाद !

Written by : सरोज देव

गौड़ाशक्ति, खगड़िया, ( बिहार )

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.