कादर खान का जीवन परिचय | Kader khan Biography in hindi

कादर खान का जीवन परिचय | Kader khan Biography in hindi

Kader khan परिचय :-

90 के दशक का हर वो बच्चा जो Bollywood movies को  देखते हुए बड़ा हुआ हो वो कादर खान नाम से परिचित ना हो, ये सम्भव ही नहीं हैं क्योंकि वो ही समय ऐसा था जब कादर खान हँसी का पर्याय बन चुके थे, उनका Film में होने का मतलब ही ये था कि फिल्म में 5 से 10 सीन जरुर comedy के होंगे।

जबकि नकारात्मक किरदारों के साथ भी कादर खान ने हमेशा न्याय किया हैं। इस तरह से कादर खान ने Bollywood की फिल्मों में विभिन्न छोटे-बड़े रोल निभाकर दर्शकों में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई हैं। कादर खान एक famous Actor  होने के साथ-साथ comedian, script और डाइलोग राइटर भी हैं।

कादर खान का जन्म तथा उनका परिवार :-

Kadar khan का जन्म 11 दिसम्बर 1937 को अफगानिस्तान के काबूल में हुआ था। कादर खान मूलत: पास्थून के काकर जनजाति के थे। अब्दुल रहमान और इकबाल बेगम के 4 पुत्रों में से एक कादर खान थे, जबकि उनके अन्य तीन भाइयों के नाम शामसउर रहमान, फज़ल रहमान, हबीब उर रहमान थे। वास्तव में 1 साल की उम्र में कादर खान परिवार के साथ मुम्बई आ गये थे और यहाँ वो झुग्गी-झोपड़ियों में रहने लगे।

kadar khan ने अजरा खान से शादी की और उनके परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे शाहनवाज और सरफराज भी हैं । जिनमें से शाहनवाज़ ने 2 फिल्मों  मिलेंगे-मिलेंगे और वादा में निर्देशक सतीश कौशिक को असिस्ट किया हैं ।

इसके अलावा उन्होंने राज कँवर की film हमको तुमसे प्यार है में राज कंवर को Artist किया था। कादर खान की व्यस्तता और बच्चों की परवरिश के सन्दर्भ में सरफराज ने एक बार Media को बताया था, कि जब वो छोटे थे तब वो अपने पिता के साथ सेट पर नही जाते थे क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे पढाई को बीच में छोडकर फिल्मों में आए, वो हमेशा पहले पढाई अच्छे  से खत्म करने को प्रेरित करते थे,

उनका इस मामले में अनुशासन इतना सख्त था कि हमें फिल्मी मैगजीन पढने से भी रोका जाता था। सरफराज़ ने कहा कि वो हमेशा से Acting करना चाहते थे, जब मैं छोटा था तब मैं टेलीविज़न देखता था, मैं अपने पिता को TV पर देखता था और रोमांचित महसूस करता था। मेरे पिता तब Week में 5 दिन काम करते थे या फिर महीने भर के schedule  के लिए बाहर जाते थे, ऐसे में हमारी माँ हमारा ध्यान रखती थी।

इस कारण मैं ये नहीं कह सकता कि मेरे पिता एक फेमस एक्टर और काम में व्यस्त होने के कारण हमारा ध्यान नहीं रख पाते थे, सच तो ये हैं कि वो जब भी हमें जरूरत होती हमेशा हमारे पास होते थे, वो यदि 5 मिनट भी हमारे साथ बिताते तो उनका वो समय Quality time ही होता था। भारत में होने पर कादर खान अब भी मुंबई में ही रहते हैं लेकिन उन्हें  india के साथ ही canada के भी नागरिकता हासिल हैं।

कादर खान की शिक्षा :-

Kadar Khan ने मुम्बई की म्यूनिसिपल स्कूल से अपनी प्रारम्भिक शिक्षा ली हैं, कादर खान पढ़ाई में मेधावी छात्र थे. इसी कारण उन्होंने आगे चलकर इस्माइल युसूफ कॉलेज (जो कि मुम्बई युनिवर्सिटी से एफिलिएटेड थी) से अपनी इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन पूरी की। उसके बाद कादर खान ने 1970 से लेकर 1975 तक मुम्बई university में पढ़ाया भी था। उन्होंने एमएच’  साबू सिद्दीक कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, बईकुला के सिविल इंजिनियर विभाग  में बतौर प्रोफेसर के तौर पर पढाया था।

कादर खान का नाटक में अभिनय से लेकर फिल्मी सफर :-

Collage के वार्षिकोत्सव के फंक्शन में कादर खान ने प्ले में हिस्सा लिया था, जिसकी सबने बहुत प्रशंसा की। अभिनेता दिलीप कुमार को जब इस प्ले के बारे में पता चला तो उन्होंने भी इसे देखने की इच्छा जताई, इसके लिए विशेष इंतजाम किये गये और कादर खान ने उनके लिए ही प्ले में अभिनय भी किया. प्ले को देखकर Dilip kumar  कादर खान से ना केवल प्रभावित हुए बल्कि उन्होंने खान को अपनी अगली 2 फिल्मों के लिए साइन भी कर लिया, जिनके नाम  “सगीना महतो” और “बैराग” थे। उस समय  Film industary  में कादर खान जैसे नए व्यक्ति के लिए ये बहुत सम्मान और गर्व की बात थी। कादर का फिल्मों में अभिनय का career 1973 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने दाग Film में काम किया था।

1981 में Kadar Khan ने नसीब film में काम किया था, जिसमें उनके साथ अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, ऋषि कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा थे। फिर साल 1982 में कादर खान ने वापिस अमिताभ के साथ ही एक और Film सत्ते पे सत्ता भी की, जिसमें उनके साथ शक्ति कपूर और हेमा मालिनी भी थी|

इसके बाद अगले साल 1983 में खान ने 4 फिल्मों में काम किया, जिनके नाम मव्वाली, जस्टिस चौधरी, जानी दोस्त और हिम्मतवाला थी, इनमे से 3 फ़िल्में जहाँ जीतेन्द्र और श्रीदेवी की थी, वहीँ एक फिल्म जानी दोस्त में धर्मेन्द्र और परवीन बाबी थी। साल 1984 में बड़े पर्दे पर कादर खान अभिनीत फिल्मों की संख्या और बढ़ गयी. अब उन्होंने नया कदम, अंदर-बाहर, कैदी, अकल्मन्द, मकसद, तोहफा और इन्कलाब जैसी फिल्मों में काम किया।

साल 1985 में कादर खान ने मासटरजी, सरफरोश, बलिदान, मेरा जवाब और पत्थर दिल में काम किया। साल 1986 में कादर खान की इंसाफ की आवाज़, दोस्ती दुश्मनी, घर-संसार, धर्म अधिकारी, सुहागन, आग और शोला जैसी फिल्मे आई, जबकि साल 1987 में उनकी हिम्मत और मेहनत, हिफाजत, वतन के रखवाले, सिन्दूर, खुदगर्ज, औलाद, मजाल, प्यार करके देखो, जवाब हम देंगे और अपने-अपने आई।

फिर साल 1988 में इन्तेकाम, बीवी हो तो ऐसी, साज़िश, वक्त की आवाज़, घर-घर की कहानी, शेरनी, कब तक चुप रहूंगी, कसम, मुलजिम, दरिया दिल, प्यार मोहब्बत, सोने पे सुहागा थी। फिर साल 1989 में चालबाज़, कानून अपना-अपना, काला बाज़ार जैसी करनी वैसी भरनी, बिल्लो बादशाह, गैर कानूनी, वर्दी, हम भी इंसान हैं, आदि फिल्मों में काम किया। साल 1990 में इन्होंने अपमान की आग, जवानी जिंदाबाद, मुक्कदर का बादशाह, घर हो तो ऐसा, किशन-कन्हैया, शानदार, बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी आदि फिल्मों में काम किया।

साल 1991 में इनकी यारा दिलदार, साजन, इन्द्रजीत, क़र्ज़ चुकाना हैं, खून का क़र्ज़, हम, प्यार का देवता, मर दिल तेरे लिए आदि फिल्मे आई। साल 1992 में इन्होंने अंगार, बोल राधा बोल, सूर्यवंशी, दौलत की जंग, कसक, नागिन और लूटेरे जबकि साल 1993 में शतरंज, तेरी पायल मेरे गीत, धनवान, औलाद के दुश्मन, दिल तेरा आशिक, रंग, गुरुदेव, दिल है बेताब, ज़ख्मों का हिसाब, कायदा कानों, आशिक आवारा, आँखें  और दिल ही तो हैं जैसी फिल्मे की।

साल 1994 में मिस्टर आज़ाद, घर की इज्ज़त, मैं खिलाडी तू अनाडी, आग, इना मीना डीका, आतिश, पहला पहला प्यार, साजन का घर, अंदाज, खुद्दार, राजा बाबु आदि फिल्मे की। साल 1995 में हलचल, कुली नम्बर 1 ताक़त, तकदीरवाला, अनोखा अंदाज़, दी डॉन, मैदान-ए-जंग, सुरक्षा, वर्तमान, ओह डार्लिंग! यह हैं इंडिया नाम की फिल्मों में काम किया।

साल 1996 में कादर खान ने “साजन चले ससुराल”, छोटे सरकार, रंगबाज, सपूत, माहिर, बंदिश और एक था राजा में काम किया। साल 1997 में आपने शपथ, भाई, मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी, दीवाना मस्ताना, हमेशा, ज़मीर, बनारसी बाबु, सनम, जुदाई, हीरो नम्बर वन, जुड़वाँ की।

फिर साल 1998 , में नसीब, कुदरत, हीरो हिन्दुस्तानी, बड़े मिया छोटे मिया, जाने जिगर, दुल्हे-राजा, घरवाली-बाहरवाली, हिटलर, आंटी नम्बर 1, मेरे दो अनमोल रतन की तथा साल 1999 में जानवर, हिन्दुस्तान की कसम, हसीना मान जायेगी, सिर्फ तुम, राजाजी, अनाडी नम्बर 1 और आ अब लौट चले आदि फिल्में की। जबकि 2000 में तेरा जादू चल गया, धडकन, जोरू का गुलाम, क्रोध, आप जैसा कोई नहीं, कुंवारा जैसी फिल्मों में काम किया।

साल 2001 में Kadar khan की सिर्फ एक फिल्म आई जिसका नाम था इत्तेफाक। जबकि साल 2002 में खान के करियर ने फिर से गति पकड़ी और उन्होंने जीना सिर्फ मेरे लिए, अंखियों से गोली मारे, बधाई हो बधाई, हाँ! मैंने भी प्यार किया है, चलो इश्क लड़ाए, वाह! तेरा क्या कहना नाम की फिल्मे की।

फिर 2003 में फंटूस, परवाना की जबकि 2004 में मुझसे शादी करोगी, सुनो ससुरजी और कौन हैं जो सपनों में आया नाम की फिल्मे की। 2005 में खान ने कोई मेरे दिल में हैं, लकी, खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे में काम किया। जबकि 2006 में उमर, जिज्ञासा, फैमिली में कम किया, और 2007 में जहाँ जाइयेगा हमें पाइयेगा, ओल्ड इज गोल्ड और अंडर ट्रायल में कम किया।

फिर 2008 में एक ही फिल्म आई महबूबा जबकि 2013 में “दीवाना मैं दीवाना आई” 2014 में ऊँगली तो 2015 में हो गया दिमाग का दही, लतीफ़ और इंटरनेशनल हीरो आई जबकि 2016 में अमन के फ़रिश्ते और 2017 में कादर खान की तबियत ख़राब होने के कारण कोई फिल्म नहीं आई।

कादर खान ने 450 से ज्यादा फिल्मों में काम किया हैं और 250 से ज्यादा फिल्मों के लिए डाईलोग लिखे हैं। उन्हें 1974 में रोटी फिल्म के लिए डाइलोग लिखने पर बहुत अच्छा वेतन मिला था। वो सुपसिद्ध स्टार अमिताभ बच्चन के अलावा फिरोज खान और गोविंदा जैसे बड़े नामों साथ काम करने के लिए प्रसिद्द रहे हैं। उनके कॉमेडी किरदारों को पहचान डेविड धवन की फिल्मों से ही मिली थी।

कादर खान ने कुछ सीरियल भी किये थे जिनमें हँसना मत, मिस्टर धनसुख, हाए! पडोसी… कौन है दोषी?? और 2012 में सब टीवी पर आने वाला मूवर्स एंड शेखर्स में काम किया था। उन्होंने 1981 में एक फिल्म शमा भी प्रोड्यूस की थी।

कादर खान और लेखन :-

2015 में  फिल्म के प्रमोशनल इवेंट  में  कादर खान ने  खुदके लेखन और अभी के समय में चल रहे लेखन के ट्रेंड बारे में बात की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि “अब तो लेखन में काफी बदलाव आ चुका हैं, और मुझे भी एक लेखक होने के नाते लगता हैं कि अब मुझे भी लेखन का काम वापिस शुरू कर देना चाहिए। मैं जल्द ही अपनी पहले वाली जुबां वापिस लाने की कोशिश करूँगा, मुझे विशवास हैं कि लोग इस जुबां में बात करना जरुर पसंद करेंगे।

कादर खान के “अमर-अकबर-एंथोनी” के डाइलोग को कोई नहीं भूल सकता। उनका शुरू से साहित्य में रुझान रहा था, लेकिन जब उन्होंने प्रोफेशनली लिखना शुरू किया तब उनका टैलेंट सामने आया और सच तो ये था कि फिल्मों में अभिनय करने से बहुत पहले ही उन्होंने लिखना शुरू कर दिया था।

कादर खान ने अपने प्ले “लोकल ट्रेन” के जरिए सम्मानित राष्ट्रीय स्तर के Competition में भाग लिया जिसे लेखक और film maker राजिन्द्र सिंह बेदी, नरेन्द्र बेदी और अभिनेता कामिनी कौशल  ने judge किया। वो उनसे play के बाद मिले और कादर को फिल्म के लिए लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। इस तरह से Kadar khan  ने 1500 रूपये में नरेंद्र बेदी की फिल्म जवानी-दीवानी के लिए लिखा।

ये फिल्म उनके लिए लेखन के क्षेत्र में मिल का पत्थर के जैसे साबित हुई। फिल्म ना केवल सफल रही बल्कि इसने कादर के लेखन में आगे के रास्ते भी खोल दिए, इसके बाद कादर ने कभी पीछे मुडकर नहीं देखा। इसके बाद कादर को मनमोहन देसाई ने “रोटी” के लिए dilouge लिखने को कहा और इससे पहले उन्हें लेखन के लिए मिले पैसों को लेकर ताना भी मारा।

इसके बाद कादर ने कुछ और सफल फ़िल्में धर्म-वीर, अमर-अकबर-एंथोनी, सुहाग, नसीब, गंगा-जमुना-सरस्वती के लिए लिखा। मुक्कदर का सिकन्दर में भी उन्होंने डाइलोग लिखने का काम किया था। film industary  और cinema में योगदान के कारण  2013 में कादर खान को साहित्य शिरोमणि Award से सम्मानित किया गया।

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