राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जीवनी | Mahatma Gandhi Biography In Hindi

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जीवनी | Mahatma Gandhi Biography In Hindi

Mahatma Gandhi Biography In Hindi – हमारे देश के राष्ट्रपति को कौन नहीं जानता! अहिंसा और सत्याग्रह करने वाले भारत के पूर्व सेनानी जिन्होंने भारत को अंग्रेजों से स्वतंत्रता दिलाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी! आज दुनिया उन्हें बापू या महात्मा के नाम से जानती है! महात्मा गांधी कहते थे बुरा मत, देखो बुरा मत, सुनो बुरा मत कहो ! उनका मानना था कि आपके अगर अहिंसा के रास्ते पर चलेंगे तो आपको कोई कोई नहीं हरा सकता!

महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था! उनका जन्म 2 अक्टूबर 18 से गुजरात के रहने वाले थे! उनके पिता का नाम करमचंद गाँधी था और माता का नाम पुतलीबाई था ! 1998 में वह इंग्लैंड ब्रेरिस्टर की पढ़ाई करने गये और वहां से बैरिस्टर बनकर लौटे !

उनका विवाह कस्तूरबा गाँधी से हुआ ! उनके बच्चों का नाम हरिलाल, मणिलाल, रामदास और देवदास था! भारत को आजाद कराने में उनका अहम योगदान है !उन्होंने लोगों को सत्य और अहिंसा के पथ पर चलने की प्रेरणा दी!

उन्होंने भारत की लड़ाई में कितने सफल आंदोलन किए – भारत छोड़ो आंदोलन, स्वदेशी आंदोलन, असहयोग आंदोलन ! छुआछूत जैसी महाबीमारी से उन्होंने लोगों को मुक्ति दिलाई ! महात्मा गांधी की मृत्यु 30 जनवरी 1948 को हुई !

भारत देश की आजादी के बाद आज हम जो आजादी की सांस ले रहे हैं उसके सेनानियों में महात्मा गांधी जी का बहुत बड़ा रोल है! उनके अथक प्रयासों ने हमारे देश को सिर्फ आजादी नहीं कराया बल्कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन हमारे देश के हित के लिए लगा दिया! महात्मा गांधी जी सत्य और अहिंसा पर चलने वाले व्यक्ति थे !

उन्होंने हर परिस्थिति में इसी राह को अपनाया और इस पर चलकर बड़े-बड़े आंदोलनों में जीत हासिल की ! “सादा जीवन उच्च विचार” की सोच रखने वाले महात्मा गांधी ने अपना सारा जीवन राष्ट्र हित लगाया है!महात्मा गांधी के कार्यों की प्रशंसा जितनी की जाए , उतनी कम है!

वह हमेशा अच्छा करने की कोशिश करते थे और अपनी गलतियों से सीखते भी थे! आज उन्हें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से बुलाया जाता है!बचपन से ही उनका जीवन बहुत ही प्रभावशाली रहा है! जब 13 साल के थे तब उनकी शादी कर दी गई थी! इतनी छोटी सी उम्र में अपनी जिम्मेदारियां उठाई !

साथ ही उन्होंने अपने जीवन को आगे बढ़ाया और अपने स्वार्थ की परवाह किए बिना अपनी पढ़ाई पूरी की और इंग्लैंड से वकालत करके भारत लौटे! जब महात्मा गांधी 1893 में भारत आए उस समय उनकी मां का देहांत हो गया !उनके लिए यह वक्त बहुत ज्यादा मुश्किल रहा!

उन्होंने अपना काम शुरू किया, एक बार महात्मा गांधी को मुस्लिम व्यापारी संस्थान के मुकदमे के चलते दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा और वहां उन्होंने रंगभेद की भावना का सामना किया ! साथ ही उन्हें रंगभेद की नीति के कारण ट्रेन से उतार दिया गया, और उनके साथ बुरा बर्ताव भी किया गया !

सत्याग्रह आंदोलन :

जिसके बाद गांधीजी के सब्र की सीमा टूट गई और उन्होंने इस बुराई के खिलाफ लड़ने का फैसला किया! 1894 में गांधीजी ने वहां रह रहे प्रवासी भारतीयों के साथ मिलकर भारतीय कांग्रेस का संगठन किया और इंडियन ओपिनियन नाम का अखबार निकाला ! इसके 6 महीने बाद दक्षिण अफ्रीकी भारतीयों के लिए अवज्ञा आंदोलन किया इस आंदोलन को बाद में सत्याग्रह का नाम दिया गया!

1915 में जब गांधीजी वापस भारत के उठे तो उनका सम्मान किया गया और उन्होंने यहां भारतीयों पर हो रहे गरीबी और अत्याचारी चारों को देखा तो उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जंग लड़ने का फैसला किया! उसके बाद  गांधी जी ने कई आंदोलन किए जिनमे पहला था !

चंपारण और खेड़ा आंदोलन:

जब अंग्रेज चंपारण और खेड़ा में शासन कर रहे थे तो वहां के किसान जमींदार से बहुत अधिक हद तक परेशान हो गये थे ! क्योंकि वहां के जमींदार किसानों का शोषण कर रहे थे और वहां भुखमरी और गरीबी के हालात बन गए थे! गांधी जी ने चंपारण में रहने वाले किसानों के लिए हक का आंदोलन किया ! जिसमें उन्होंने किसानों को 25 फीसदी तक धनराशि वापस दिलाई!

यह आन्दोलन अहिंसात्मक आंदोलन के रूप में किया और जीत भी हासिल की !इसके बाद गांधी जी की छवि लोगों में अलग से ही नजर आने लगी, और फिर उन्होंने खेड़ा में किसानों की मदद की जहां पर अकाल का पहाड़ टूट पड़ा था! उन्होंने लगान माफ करने का प्रस्ताव अंग्रेजों के सामने रखा और गाँधी के इस प्रस्ताव को मान लिया गया !

खिलाफत आंदोलन :

उसके बाद आता है खिलाफत आंदोलन! यह आन्दोलन 1919 से 1924 तक चला , जिसे मुसलमानों ने शुरू किया था ! यह आन्दोलन तुर्की के खलीफा पद की दोबारा स्थापना हेतु चलाया गया था। इस आन्दोलन के जरिए गाँधी जी ने हिंदू-मुस्लिम एकता का भरोसा जीता और इसी के दम पर असहयोग आन्दोलन की शुरुआत हुई !

असहयोग आंदोलन :

१९१९ में असहयोग आंदोलन शुरू हुआ जो की १९२० तक चला ! इस आंदोलन की शुरुआत जलियावाले हत्याकांड से हुई! जहां रोलेक्ट एक्ट के विरोध के लिए अमृतसर के जलियावाले बाग में चल रही सभा में एक ब्रिटिश ऑफिसर ने गोलिया चलवा दी थी!

जिसमे १००० से भी ज्यादा लोग मर गये थे और २००० के लगभग घायल हो गये थे! इस घटना से भारतीयों और गांधीजी को बहुत शौक लगा और उन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ शांति और अहिंसा के पथ पर चल कर अंग्रेजों को खढेने का फैसला किया ! साथ ही गांधी जी ने ब्रिटिश भारत में राजनैतिक, समाजिक संस्थाओं का बहिष्कार करने की मांग की।

इसमें उन्होंने सरकारी कॉलेजों का बहिष्कार, सरकारी अदालतों का बहिष्कार, विदेशी मॉल का बहिष्कार, 1919 अधिनियम के तहत होने वाले चुनाव का बहिष्कार करने की बात लोगों के सामने रखी !इसके बाद १९२२ में चौरी चौरा कांड हुआ जिसमे 5 फरवरी को में कांग्रेस ने जुलूस निकाला लेकीन उस जुलुस में लोगो में हिंसा भड़क गयी, और बेकाबू होती भीड़ ने एक थानेदार और 21 सिपाहियों को थाने में बंद कर आग लगा ली।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन :

जिसमे सभी लोगों की मौत हो गई थी! इससे गाँधी को बहुत आघात पंहुचा और उन्हूने अपने यंग इंडिया अखबार में लिखा की “आंदोलन को हिंसक होने से बचाने के लिए मै हर एक अपमान, यातनापूर्ण बहिष्कार, यहां तक की मौत भी सहने को तैयार हूं”! फिर १९३० में शुरू हुआ सविनय अवज्ञा आन्दोलन / नमक आन्दोलन ! जो की गाँधी जी ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ शुरू किया ! और इसमें उन्होंने ब्रिटिश सरकार का एक भी फैसला मानने से इंकार कर दिया !

अंग्रेजों के नमक ने बनाने वाले नियम को 12 मार्च १९३० में दंधी यात्रा द्वारा नमक बनाकर तोड़ दिया गया वे दांडी नमक जगह पर गए जहां उन्होंने नमक बनाया  और अंग्रेजों के कानून की धज्जियाँ उड़ा दी ! इसके बाद यह यात्रा ६ अप्रैल १९३० तक चली और साबरमती आश्रम से होकर निकली इस आन्दोलन को रोकने के लिए अंग्रेजों ने तुरंत वायसराय लॉर्ड इरविन को भेजा और गाँधी जी ने अग्रेजों के साथ समझौता किया !

इसके बाद शुरू हुआ भारत छोड़ो आन्दोलन जो की १९४२ में शुरू किय गया ! यह महात्मा गाँधी द्वारा किया गया सबसे बड़ा तीसरा आन्दोलन था इसे “अंग्रेजों भारत छोड़ो” नाम दिया गया! इस आन्दोलन में गाँधी जी को जेल तक जाना पड़ा ! यह वो समय तक जब देश का बच्चा – बच्चा आज़ादी के लिए लड़ी लड़ने को तैयार था !

अंग्रेजों से तंग आकर सभी ने देश के स्वंत्रता संग्राम में अपना सहयोग देना शुरू कर दिया था !लेकीन कुछ कारणों के कारन यह आन्दोलन असफल रहा ! जिसके कई कारन थे जैसे – पुरे देश में एक साथ इस आन्दोलन का शुरू ना होना ! अलग अलग तारीखों पर आन्धोलन की शुरुआत आदि!

लेकीन भले ही यह आन्दोलन सफल न रहा हो लेकीन ह्मरेश को आज़ादी दिलाने में इसका अहम योगदान रहा ! जिसने अग्रेजो को यह एहसास दिला दिया की अब भारत को आज़ादी चाहिए और अंग्रेजी हुकूमत अब और ज्यादा नहीं चल सकती ! इसके बाद १५ अगस्त १९४७ को हमारा देश आज़ाद हो गया !

गाँधी जी ने सत्य और अहिसा के मार्ग पर रहे कर ही लड़ाई लदी और सदैव अहिसवादी रहें की प्रेरणा दी ! 30 जनवरी १९४८ को घंडी जी की मृत्यु हो गयी जिसका कारन नाथूरामगोडसे और उनके सहयोगी गोपालदास रहे १ उन्होंने गाँधी जी को गोली मार दी और उनकी हत्या हो गयी !

गाँधी जी सदैव हमारे लिए प्रेरणादायी रहे है और आगे भी रहेंगे उन्होंने सम्पूर्ण विश्व में अपनी एक अलग पहचान कायम की है वो एक महानायक थे जिन्होंने आजीवन सत्य, अहिंसा और प्रेम का पथ प्रदर्शन किया !

तो दोस्तों हम उम्मीद लकरते हैं की आपको राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जीवनी | Mahatma Gandhi Biography In Hindi काफी पसंद आया होगा और इसे आप अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करना चाहेंगे

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