कागज और मानव – Poem On Human Rights In Hindi

कागज और मानव

कागज की नाव में बैठा, मानव वह जा रहा है,समुद्र के थपेड़ों से ,कागज और मानव एक हो

 

इधर-उधर बोल रहे हैं ,अंतराल मिट जाने से मानव भी कागज में ,सिमट गया है

 

और …..कागज के मानव में

बुद्ध प्रतिमा निखार लिए, विकास की हिलोरे ले रहा है

 

और …..मानव का हृदय

एक मानव करना कि चित्कार, के लिए अदू लता को

 

कागज में बिखेर कर, चुप घुटन में

सिमट रहा है ,और …..

 

अतृप्त आत्मा ,भटकन खेल में

भूलने का प्रयास मात्र कर ,आसान कागज के

 

टुकड़ों पर ,आंसू की लड़ी लिए

एक कहानी रच ,घर रह गई ||

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