राजीव दीक्षित का जीवन परिचय व हत्या का रहस्य : Rajiv Dixit Biography Hindi

राजीव दीक्षित का जीवन परिचय व हत्या का रहस्य : Rajiv Dixit Biography Hindi

Rajiv Dixit Biography Hindi : दोस्तों!आज मैं वैसे महान देशभक्त ही नहीं एक ज्ञानवान वैद्य का जीवनी बताने जा रहा हूँ वैसे तो आप जानते ही होंगे कि हमारा भारत देश ऋषि – मुनियों का देश रहा है। जिन्होंने एक से एक जड़ी -बूटी का शोध कर हमारे बीच देकर गए हैं जो भारी से भारी बीमारी को सरलता से ठीक कर देती है इतना ही नहीं एक से एक गूढ़ रहस्य का पर्दा उठा कर हम भारतवासियों का आँख खोलने का काम किया है। जो की भारी से भारी बीमारी जादू की तरह ठीक हो जाती है।

आज हमारे बीच प्रकृति ने राजीव दीक्षित भाई को भेजा उन्होंने जो हमारे बीच देकर गए वह सराहनीय ही नहीं, बल्कि बड़ी यादगार छोड़ कर चले गए, इसका में वर्णन करने जा रहा हूँ ।

आप इस आर्टिकल के अंत तक हमारे साथ बने रहे अगर आर्टिकल आपको अच्छा लगे तो लाइक बटन दबा कर कमेंट के माध्यम से अपनी बात हम तक पहुँचाने का जरूर कोशिश करेंगे और अपने दोस्तों तक पहुँचाकर उनकी देश भक्ति और सच्चे वैद्य एवं चरित्रवान व्यक्तित्व होने का जानकारी ले सके। ताकि भारत का एक -एक बच्चा राजीव दीक्षित भाई बन सके।

जन्म और शिक्षा -दीक्षा :

 RajivDixit(राजीवदीक्षित)का जन्म 30 नवम्बर 1967 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के नाह गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम राधेश्याम दीक्षित और माता का नाम मिथिलेश कुमारी दीक्षित था। राजीव दीक्षित के दादाजी भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय थे जिन्होंने कई स्वदेशी आंदोलनों में भाग लिया था। राजीव दीक्षित के पिताजी BTO ऑफिसर थे।

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राजीव दीक्षित के परिवार में उनके छोटे भाई प्रदीप दीक्षित और बहन लता शर्मा है। राजीव दीक्षित ने अपना बचपन गाँव नाह में ही बिताया था। जहाँ से उन्होंने प्राथमिक शिक्षा ली थी। उन्होंने अपने एक व्याख्यान में अपने गाँव के बारे में बताया था कि उनके गाँव में अभी तक बिजली और रोड नहीं है जिसके कारण उन्हें गाँव से पाँच से छह कि.मी.पहले ही उतरकर गाँव में पैदल जाना पड़ता था |

Rajiv Dixit (राजीव दीक्षित) ने अपनी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद से ली थी। अपनी उच्च माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वो इलाहाबाद B.Tech पढने के लिए गये। इलाहाबाद में उन्होंने JK इंस्टिट्यूट नामक कॉलेज से उन्होंने B.tech की डिग्री ली |

और बाद में M.Tech की डिग्री ली थी। इस दौरान भोपाल गैस हत्याकांड से काफी पीड़ित हुए थे जिसकी वजह से उन्होंने बी.टेक बीच में रोक दी, लेकिन इसे बाद में पूरा करके उन्होंने अपनी शिक्षा पुरी की थी। अब आइये आपको उनके स्वदेशी आन्दोलन से प्रेरित होने की कहानी के बारे में बताते
हैं।

स्वाभिमान अभियान :
Rajiv Dixit राजीव दीक्षित पूरे देश में अपने भारत स्वाभिमान अभियान का प्रसार कर रहे थे। इन्ही प्रचार- प्रसार के दौरान 26 नवम्बर 2010 को छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में गये थे। यहाँ पर उन्होंने दो जनसभाओ को सम्बोधित किया था। उसके अगले दिन वो जांजगीर जिले में व्य्खायान देने गये जहाँ पर भी उन्होंने दो विशाल जनसभाएँ की थी।

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इसके 28 नवम्बर को बिलासपुर और 29 नवम्बर को दुर्ग जिले में पहुँचे थे। अब दुर्ग में अपने व्याख्यान देने के लिए बेमेतरा तहसील से वो रवाना हुए। वहाँ पर रास्ते में ही उन्हें पसीना आने लगा था। उनके साथ जा रहे आचार्य दयासागर ने उनसे तबीयत के बारे में पूछी तो उन्होंने बताया था कि उन्हें शायद गैस की शिकायत है। इसलिए आचार्य दयासागर उनको अपने दुर्ग वाले आश्रम में लेकर गये।

बाबा रामदेव,राजीव दीक्षित की मुलाकातें :

सन 1999 में राजीव दीक्षित( Rajiv Dixit) की मुलाक़ात योग गुरु स्वामी रामदेव से हुई थी, जो उस समय योग को देश में फ़ैलाने के लिए अग्रसर थे। अब स्वामी रामदेव से मुलकात के बाद उन्होंने भारत को स्वावलम्बी और स्वदेशी बनाने के लिए दस वर्षो तक अथक प्रयास किया था।

दस वर्षो के बाद दोनों ने मिलकर 2009 में “भारत स्वाभिमान” की स्थापना की थी। इस “भारत स्वाभिमान” के राष्ट्रीय सचिव का पद राजीव दीक्षित को दिया गया। बाबा रामदेव भी राजीव जी के व्याख्यानों से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने कई व्याख्यान अपने पतंजली योगपीठ में करवाए, ताकि उनकी बात टीवी के माध्यम से पूरे देश की जनता तक पहुँच सके।

कई खास मुद्दों पर प्रकाश डाले :

 1 अप्रैल 2009 को भारत स्वाभिमान का उद्घाटन हुआ था ।जिसे आस्था टीवी चैनल पर सीधा प्रसारित किया गया था। यहीं से उनकी लोकप्रियता चरम सीमा पर पहुँच गयी थी और देश के लाखों लोग उनके चमत्कारी अमृत वाणी सुनने लगे। वे व्याख्यान इतनी सरल भाषा में करते थे कि उनको समझना बड़ा आसान था।

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उन्होंने इतनी सरल भाषा में वर्णन किये जो देश के लोगों को भारत का वास्तविक इतिहास और स्वदेशी की महत्ता का पता चल पाया। उन्होंने इस भारत स्वाभिमान के तहत् कई विदेशी कंपनियों का खुलासा किया था जो भारत को अनेक वर्षो से लुट रही है। उनको राजीनीतिक पार्टियों से भी आपत्ति थी और उन पर खुलकर प्रहार करते थे। इसी के साथ उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा पद्धति, देश के संविधान, कानून प्रणाली जैसे कई मुद्दों पर तथ्यों के साथ वर्णित किये थे।

स्वास्थ्य का बिगड़ना : राजीव दीक्षित जी अपने स्वास्थ्य को सही नहीं पाकर और दिमाग में चक्कर देख कर आश्रम में आकर वो सीधा शौचालय में गये। काफी देर बाद जब राजीव जी बाहर नहीं निकले तो दरवाजे को तोड़ा गया। उस समय राजीव जी पसीने से भीगे हुए बेहोश होकर नीचे पड़े हुए थे। उन्हें तुरंत उठाकर बिस्तर पर लेटाया गया और पानी छिड़का गया।

आचार्य दयासागर ने उन्हें तुरंत अस्पताल जाने को कहा लेकिन Rajiv Dixit (राजीव दीक्षित ) ने ये कहकर मना कर दिया कि वो होम्योपैथी डॉक्टर को दिखायेंगे। थोड़ी देर बाद होम्योपैथी डॉक्टर ने आकर उन्हें दवाइयाँ दी। फिर भी उनकी तबीयत में सुधार ना होने पर उन्हें अस्तपाल में भर्ती कराया गया।

इसके बाद उन्हें अपोलो हास्पिटल ले जाया गया। अब उन्हें ICU में भर्ती कराया गया जहाँ पाँच डॉक्टरो की टीम मिलकर राजीव दीक्षित जी का गहन इलाज की। उस रात 30 नवम्बर 2010 को लगभग 2:00 बजे डॉक्टरो ने राजीव दीक्षित को मृत घोषित कर दिया।

मृत्यु :

Rajiv Dixit (राजीव दीक्षित)के मृत्यु का बिना कारण जाने, बिना पोस्टमार्टम कराए जनता तक ये बात पहुँचाई गयी कि उनकी मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। राजीव दीक्षित का मृत्यु के समय शरीर नीला पड़ने से ऐसा प्रतीत होता था कि उनके शरीर पर कोई घातक जहर का प्रयोग किया गया। वैसे राजीव दीक्षित के कई साथियों का भी शक की सुई poisisones cesh पर ही जाती थी, लेकिन फिर भी उनका पोस्टमार्टम नहीं कराया गया था।

राजीव दीक्षित के मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई प्रदीप दीक्षित भी वहाँ पर पहुँचे। स्वामी रामदेव ने राजीव दीक्षित के मृत्यु की खबर को अपने योग शिविर के माध्यम से देश की जनता तक पहुँचाने का काम किया था। उसके बाद भिलाई से राजीव दीक्षित के पार्थिव शरीर को रायपुर मेडिकल कॉलेज में लाया गया। यहाँ से उनके भाई प्रदीप दीक्षित राजीव दीक्षित के पार्थिव शरीर को पतंजली योगपीठ लेकर आये।

यहाँ पर उनके परिवार और उनके शुभचिंतकों ने उनके अंतिम दर्शन किये थे। उसके बाद 1दिसम्बर को राजीव दीक्षित का दाह संस्कार हरिद्वार में किया गया | Rajiv Dixit राजीव दीक्षित की मृत्यु के बाद उनके शुभचिंतकों ने राजीव दीक्षित के पोस्टमार्टम न किये जाने पर भाड़ी विरोध प्रकट किया था। क्योंकि उनका मानना था कि आयुर्वेद को इतना करीब से जानने वाले को दिल का दौरान कैसे पड़ सकता है?

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जबकि वो वर्षो से दिल के दौरे के लक्ष्ण और उपाय दुनियाँ को बताते रहते थे। उनके शुभचिंतक इस घटना के पीछे किसी पुरानी रंजिश का हाथ होने का शंका जता रहे थे, जिसका पता पोस्टमास्टम नहीं होने के कारण उनकी मृत्यु का राज हमेशा -हमेशा के लिए एक रहस्य बनकर कानून के ठंडे बस्ते में दबकर रह गई।

हमारे अच्छे दोस्तों!
हम लोग एक छोटे गाँव और कस्बे में अगर बुराई को दूर भगाकर अपने गाँव और कस्बों को समृद्ध, शक्तिशाली, ईमानदार बनाने के रास्ते में अगर चलते हैं तो हजार दुश्मन आकर खड़े हो जाते हैं, लेकिन वही हमारे देश का मित्र राजीव दीक्षित भाई गाँव कस्बे ही नहीं, पूरे देश को अच्छा स्वास्थ्य और शक्तिशाली देश बनाने का रास्ता चुना और उस रास्ते पर अपने देश को लेकर चलना प्रारंभ भी कर दिया।

बड़े से बड़े कंपनी का पेय पदार्थ अथवा भोज्य पदार्थ की अशुद्धता को दर्शाकर और राजनीति सत्ता धारियों का खामियांँ को निकाल कर जनता के सामने रख दिया करते थे। जिससे की जनता की आँखें खुलने लगी थी। बड़ी से बड़ी कंपनी घाटे की खाई में गिरने लगी।

सारी बीमारी पर सरलता से पकड़:

 इन्होंने भारी से भारी बीमारी का इलाज चुटकी बजाते ही कर देते थे। अभी भी देखा जाए तो राजीव दीक्षित भाई की औषधि गूगल और यूट्यूब पर धड़ल्ले से चल रही है और कठिन से कठिन बीमारी को सरलता से उनके औषधि का सेवन कर अपने घर में ही उपचार कर लेते हैं। इस प्रकार बीमारी में होने वाले खर्च बहुत सरलता और कम खर्च में कर लेते हैं।

इसमें समय का भी बचत होता है और आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक के जरिए इलाज कर ठीक हो जाते हैं। यह औषधि सेल को भी प्रभावित नहीं करता है। राजीव भाई की एक – एक औषधि अनमोल है।

एक साधारण औषधी की बात करूँ तो आप देखें चूना कितना साधारण है। वो भी बहुत कम कीमत का, मात्र ₹2 रुपए, लेकिन हमारे राजीव भाई ने अच्छी ज्ञान हासिल कर उन्होंने दर्शा दिया की एक चूना 70 बीमारी में कार्य करता है।

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आप साधारण में देखें तो हड्डी में कमजोरी या ज्वाइंट पेन ज्यादा होता है तो आप पान के जरिए अथवा दाल या दूध में मिलाकर एक गेहूँ दाना के बड़ाबर सुबह -शाम प्रयोग करते हैं अर्थात खाते हैं, तो हड्डी की समस्या दूर हो जाती है यानी आपका हड्डी मजबूत हो जाता है और टूटे हुए हड्डी में रिपेयर अर्थात् जोड़ने का काम करती है।

चुके आप तो जानते ही हैं कि चूना डायरेक्ट कैल्शियम ही है। इसमें कोई मिलावट नहीं है। यह कोई मेडिसिन नहीं है। यह तो प्रकृति के द्वारा दिया हुआ अनमोल तोहफा है, जो रामबाण काम करती है। इतना ही नहीं इतनी ही सरल रूप से भारी से भारी बीमारी पर भी विजय प्राप्त कर लेते थे।

राजीव दीक्षित के अनमोल वचन: 

नंबर 1. स्वस्थ्य जीवन के बारे में लोगों को दिए अपने वक्तव्य में उन्होंने बताया कि भोजन करने के उपरांत 1 घंटे तक पानी नहीं लेना चाहिए।
नंबर 2. पानी को कभी भी तेजी के साथ न पीयें इसे धीरे-धीरे घुट घुट कर पीना चाहिए।
नंबर 3. कभी भी भूल से भी खड़े होकर पानी नहीं पीना चाहिए चुके खड़े होकर पानी पीने से लिवर और किडनी पर विशेष प्रभाव पड़ता है और हर्निया रोग भी होने का ज्यादातर चांस हो जाता है
नंबर 4. सुबह को पानी की भरपूर मात्रा का सेवन करना चाहिए साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सुबह के भोजन को विशेष रूप से ग्रहण करें इससे आप स्वस्थ रहेंगे।

नंबर 5. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति का शरीर निर्माण अलग- अलग होता है। विशिष्ट स्वास्थ्य समस्या वाले लोगों को अपने डॉक्टर के परामर्श ले कर आहार को ग्रहण करना चाहिए |

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दोस्तों! Rajiv Dixit (राजीव दीक्षित) भले ही इस दुनियाँ में नहीं रहे लेकिन उनका कार्य कुशलता, अमृतवाणी, अचूक औषधि और अपने देश के प्रति समर्पण विचार, स्वाभिमान से जीने का तरीका हमारे बीच छोड़ कर गए जिससे हम पूरे भारतवासी ऐसे देश भक्त को शत – शत नमन करना चाहेंगे जिन्होंने इतनी गूढ़ ज्ञान को प्राप्त कर हम सभी भारतवासीयों को सही मार्ग प्रशस्त करने का काम किए।

उन्होंने अपनी अद्भुत ज्ञान से अपने ही देश में अपने ही भाई का कैसे शोषण करता है? के बारे में बताया। इतना ही नहीं विदेशी कंँपनी हमारे देश में आकर किस प्रकार हमारे देश से रुपया अपने देश में खींच ले जाता है ?

और कुछ बड़ी -बड़ी कंपनियाँ मिलावटी पेय पदार्थ एवं भोज्य पदार्थ कैसे हम तक पहुंँचाती है?और हमारे देश का नुकसान कर हमें भारी से भारी बीमारी का का शिकार बनाती है।

राजीव दीक्षित के महत्वपूर्ण अभियान एवं रोचक तथ्य:

1. राजीव दीक्षित ने पेप्सी और कोको कोला जैसी दिग्गज कंपनियों से लोहा लिया और यह साबित किया कि इन सभी कोल्ड ड्रिंक्स में हानिकारक तत्व होते हैं जो सेहत के लिए बहुत ही नुकसानदेह होते हैं।
2. राजीव दीक्षित ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर वर्ष 1991 में आजादी बचाओ आंदोलन की शुरुआत की थी
3. तिहाड़ जेल में उन्होंने शरीर परीक्षण प्रणाली का भी भारी विरोध किया था
4. कंपनी ड्यू प्वाइंट के विरुद्ध आंदोलन छेड़ा और उन्हें लौटने के लिए मजबूर किया।
5. वर्ष 1947 में राजीव दीक्षित योग गुरु बाबा रामदेव के संपर्क में आए थे। उस समय बाबा रामदेव से मिलकर वर्ष 2009 मैं भारत स्वाभिमान की स्थापना की थी और राजीव दीक्षित इस संस्था में राष्ट्रीय सचिव के पद को संभाले हुए थे।

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6. राजीव दीक्षित के रिसर्च पेपर अनुसार अंग्रेजों ने कूल 34,735 कानून बनाए। वह सारे कानून देश का शोषण करने के लिए बने थे और सबसे दुख की बात तो यह रही कि उनमें से ज्यादातर आज तक यथावत ही है।

आज राजीव दीक्षित भाई की गाथा सत्य प्रतीत हो रही है। बड़ी बड़ी कंपनीयाँ मिलावटी सामान तैयार कर हमारे सेहत से खिलवाड़ करती है, जैसे कुछ दिन पहले सरसों तेल में अलकतरा तथा पंप ऑयल मिलाकर डुप्लीकेट सरसों तेल तैयार कर हमारे घर तक पहुंँचाने काम करती है।

जिसके कारण कुछ फैक्ट्रियों को सिल भी कर दिया गया। इतना ही नहीं बड़े -बड़े शहरों में बिस्कुट कुरकुरे में भी मिलावटी होने लगा यह सब जानकारी हम तक पहुंँचती है जब कानून के शिकंजे में कंपनियाँ आती है, तब तक में हमारा शरीर स्लो प्वाइजन का सेवन कर चुकता है।

संदेश :

दोस्तों! हम सभी भारतवासी का पूर्ण कर्तव्य एवं धर्म होता है कि राजीव दीक्षित भाई का दिया हुआ पैगाम को कठोरता से पालन करें और अपने देश में शुद्ध और स्वदेशी समान का उत्पादन करें और प्रयोग भी । इससे हमारे राजीव दीक्षित भाई का अधूरा सपना पूरा हो जाएगा और पूरा करना हम सभी भारतवासी का कर्तव्य है। जिससे हमारा देश का पूरा विश्व में एक अलग पहचान बने रहे ।जय हिंद।

सरोज देव
खगड़िया,बिहार,( इंडिया)

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